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ब्रिटिश राज में गरमदल-क्रांतिकारियों व नरमदल के लिए जेलो का अन्तर।

श्यामसुन्दर पोद्दार

(कटक)

उपरोक्त चित्र भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ने वालो को उनके कार्यों के हिसाब से बिभिन्न प्रकार की सुविधाओं के साथ जेलो में रक्खा जाता था। यह बात जेलो के उपरोक्त चित्रो स साफ़ दिखलाई पड़ रही है। बाई तरफ़ का चित्र अंडमान की जेल में कालापानी की सजा काट रहे क्रांतिकारी सावरकर की काल कोठरी का है। दाई तरफ़ में उपर का चित्र नरम दल के नेहरू के जेल के कमरे का है व नीचे वाला चित्र नरमदल के मुखिया गांधी को जब आगाखान के महल के जिस कमरे में क़ैद करके ब्रितानिया हुकूमत ने रक्खा था उसका है। एक जेल इनसे भी कठिन थी बर्मा के मॉंडला ज़ैल इस ज़ैल में क़ैदी को इसलिये क़ैद करके रक्खा जाता था की वहा वर्षों रहते हुवे बिभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो जाये तथा शीघ्र स्वर्ग सिधार जाये। इस जेल में लाला लाजपत राय को बंगभंग आन्दोलन चलाने के लिए दो वर्ष तक क़ैद करके रक्खा गया था। सुभाष चंद्र बोस को भी लगभग लाला लाजपत राय के बराबर अवधी तक क़ैद करके रक्खागया था। सबसे लम्बी अवधी तक लोकमान्य तिलक को ६ वर्ष तक ख़ुदीराम बोस को फाँसी दिये जाने पर प्रतिवाद स्वरूप अपने समाचार पत्र में सम्पादकीय लिखने के लिए क़ैद करके रक्खा गया था। ६ वर्ष तक बर्मा की मॉंडला जेल में क़ैद काटने के बाद जब वे १९१५ में बाहर आये तो उनका शरीर बीमारियों से जर्जर हो गया था और जेल से निकलने के बाद कम उम्र होने के बावजूद ५ वर्ष में ही स्वर्ग सिधार गये। वही नरमदल वाले नेहरू स्वस्थ रह कर लम्बी उमर प्राप्त करे उन्हें क़ैद करके अलमोड़ा के हिल स्टेशन में रक्खा जाता था। सुभाष चंद्र बोस ने मांडला जेल से अपनी भाभी को अपने पत्र में सुभाष बाबु लिखते है “मैं कितना सौभाग्यशाली हु सरकार मुझे महान तिलक, लाजपत राय की श्रेणी का क़ैदी समझती है, तिलक की मृत्यु इतनी शीघ्र नही होती यदि उन्हें मांडला जेल में ६ वर्ष नही रहना पड़ता”सावरकर सरीखे गरमदल वाले क्रांतिकारी को ज़ैल में कोल्हू में तेल निकालने के लिए जोता जाता था। नारियल के छिलके उतारने पड़ते थे हाथ लहू लूहान हो जाते थे खड़ी बेड़ी लगाकर कई दिनो खड़ा रहना पड़ता था वही नेहरू को लाइब्रेरी की सुविधा मिलती थी व वे वहा पुस्तकें लिखते ऊस वास्ते उन्हे सभी सहूलियतें दी जाती थी। जबकि सावरकर को कविता लिखने के लिए जेल अधिकारियों से छिपकर लोहे की कील से दीवार पर लिख कर फिर कंठस्थ करना पड़ता था। लोहे की जंग लगी थाली में कीड़े मकोड़े से भरा खाना खाना पड़ता था नेहरू के लिए उनकी फ़रमाइस का खाना मिलता ज़रूरत पड़ने पर बाहर से उनके ऑर्डर के हिसाब से पाँच सितारा होटेल से लाया जाता था। तिलक की मांडला ज़ैल से ६ वर्ष से पहले मुक्ति नही होती। तिलक के समान गाँधी ने भी समान अपराध किया था उन्हें ६ वर्ष के लिये मांडला जेल नही भेज कर अहमद नगर जेल भेजा जाता था ६ वर्ष के पहले ही २ वर्ष की सजा काटने के बाद छोड़ दिये जाते थे। नेहरू को २ वर्ष की सजा में नाभा जेल में भेज दिया जाता था पर उनका माफ़ीनामा स्वीकार हो जाता तथा २ वर्ष के बजाये १४ दिनो बाद ही छोड़ दिये जाते थे।सावरकर वर्ष में अण्डमान जेल में क़ैद में रहने के समय सिर्फ़ एक पत्र लिख कर ही अपने परिवार से सम्पर्क रख सकते थे। गांधी अपनी पत्नी कस्तूरबा के साथ क़ैद में आगाखान महल में रहते थे। यह था अंगरेजो की जेल में नरमदल व गरमदल वालो के साथ क़ैदी जीवन में ज़मीन आसमान का विशाल अंतर।

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